मेरे कई मित्र शायद यह सोच रहे होगे कि रोज अंग्रेजी छाटने वाली आज हिंदी मे कैसे, तो उन सबको कहना चाहती हूँ की सारी दुनिया एक तरफ और अपनी मात्र भाषा एक तरफ,आजकल देश के आर्थिक मुद्ददो पर चर्चा करना बढी ही आम बात हो गई है, चाय कि टपरी या किसी महंगे रेस्टरान्ट मे बैठ कर यह कहना बढा ही आसान है कि मै अपने देश के लिए यह कर सकता हूँ , वो कर सकता हूँ ......पर कया सही मे अपने देश के लिए कुछ कर सकते हो, शायद आप मेसे कुछ 'हाँ' कहे परंतु एक कटु सत्य
यह भी हे कि हम बढी बढी बाते तो करते हे लेकिन उसपर कभी गंभीर हो कर नही सोचते....अरे आज पता हे ' अखबार 'या 'समाचार' मे 'ये 'था... आज पता हे ' अखबार ' या 'समाचार' मे 'वो' था मे ही रह जाते है....हालही मे असहिष्णुता का मुद्ददा बढा हि गरमाया हुआ था...बढे बढे बुद्धिजीवो ने अपनी - अपनी राय रखी, काफी हो हऌा भी मचा , पर कया आप भी एेसी वीचारदारा रखते हो मित्रो...भाई मुझे तो कभी ऐसा नही लगा और मेरा मानना हे की अगर इस देश के सच्चे
नागरीक हाे तो आप को भी ऐसा नही लगना चाहिए, अगर फिर भी शक हे तो जाँककर देखो उस माँ कि आँखो मे जीसकी नजरे सदेव द्ववार पर टिकी रहती है, अपने उस आँखो के तारे पर जो किसी देश कि सीमा पर हमारी और आपकी रक्षा करता है, सहिष्णल तो उस वृदध पिता के अशक है जो अपने सैनिक बेटे की शहादत पर बहना तो चाहते है लेकिन किसी तरह अपनी मात्र भूमी के प्रेम वष अपने आप को रोक लेते है| सहिष्णल ताे वे सैनीक है जो चीलमिलाती धूप को अपना मित्र बना देते है और बर्फिले तुफानो को अपना संगीसाथी बना लेते है, अरे अगर सहिष्णलता देखनी है तो इन सैनीको की शहादत मे देखो....उनके बचो की उस तिलमिलाहट मे देखो जो ना जाने कितने दिन अपने पिता को गले से लगाना चाहते होगें|
देखो उन वृदध माँ-बाप कि बुढापे कि लाठी को जो हमारे माँ-बाप कि रक्षा के लिए कितनी कठीन परिस्थिति का सामना करते है| कया भीतती होगी उस माँ के ह्रदय पर जब उसका अपना खून आपके अपनो के लिए खून बहाता है....मित्रो यह भी आपको बढी-बढी बाते लग रही होगी...पर कतई नही कयोकी मेरा मानना यह है कि अगर अपने देश के लिए कुछ करना हि चाहते हो तो ईन असहिष्णुता की बातो को परे रख उनका समान करो जो देश के आत्मसम्मान
के लिए समुद्र की उफानी लहरो से लेकर बादलो को चीरते हुए, बर्फ की सफेद चादर मे लिपटे, रेगिस्तान की तपतपाती रेत मे अपने देश की अापकी और हमारी रक्षा करते है| मुझे अपने भारतीय होने पर गर्व है, गर्व है मुझे हमारे देश कि थल सेना, वायु सेना तथा नेवी पर....मत बुलो कि जब रात को हम सब चैन कि नींद सोते है तब वे सीमा पर रहकर हम सबकी रक्षा करते है; मत बुलो कि अगर एक माँ ने उसे जान दी है, तो एक माँ के लिए उसने अपनी जान भी दि है.......|
Tuesday, 4 October 2016
एक माँ ने जान दि....... एक माँ के लिए उसने अपनी जान दि......
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